
श्री प्राणनाथ जी वाणी (सोमवार – शुक्रवार)
|| प्रीतम मेरे प्राण के सुंदरसाथ जी ||
श्री बीतक साहेब
श्री राम रतन दास जी
शास्त्र पुराण भेषपंथ खोजो, इन पैड़ों में पाइए नाहीं। सतगुरु न्यारा रहत सकल थें, कोई एक कुली में क्याहें ।।

श्री प्राणनाथ जी की वाणी
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