
श्री प्राणनाथ जी वाणी (सोमवार – शुक्रवार)
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ध्यान, वाणी मन्थन और सेवा ही सुन्दरसाथ की आत्मिक सम्पति है

श्री राजन स्वामी जी
वाणी मंथन, चितवन और रहनी का कोई विकल्प नहीं

"सरकार श्री" जगदीश चन्द्र जी
सदगुरु की महिमा बड़ी, बड़ी हैं उनकी बात। हो समानता किस तरह, बड़ी है उनकी जात।।

परमहंस 108 श्री राम रतन दास जी महाराज
जो निज नाम ध्यावे, सो भवसागर तर जावे।। श्री प्राणनाथ जी की वाणी अमृत समान है।

महामति जी