हमारे प्रेरणास्रोत सद्गुरु
श्री सतगुरु व परमहंस
भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में गुरु का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। स्कंध पुराण में तो गुरु को ही परमात्मा की संज्ञा दी गई है।
गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु:, गुरुर्देवो महेश्वर: ।
गुरु साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ।।
अर्थात् - गुरु ही ब्रह्म रूप है क्योंकि वह शिष्य को बनाता है, गुरु विष्णु रूप है क्योंकि वह शिष्य की रक्षा करता है, गुरु शिव रूप है क्योंकि वह शिष्य के सभी दोषों का संहार भी करता है, गुरु ही साक्षात् परब्रह्म परमात्मा का स्वरूप है, ऐसे समर्थ गुरु को मैं प्रणाम करता हूं । श्री गुरु अर्जुन देव जी भी अपनी पवित्र वाणी में गुरु को परमात्मा के समान बताते हैं।
गुरु की महिमा कथनु न जाई, पारब्रह्म गुर रहया समाई ।
अर्थात् - गुरु की महिमा का बखान शब्दों में नहीं जा सकता, वह परब्रह्म परमात्मा ही सतगुरु रूप में निवास करता है । सतगुरु परमात्मा का ही रूप होता है । सद्गुरु का शब्दार्थ है सच्चे (सत्य, अखंड) गुरु अर्थात् वह गुरु जो हमें सत अखंड परमात्मा की पहचान करवाए। इसी संदर्भ में सद्गुरु की महिमा अत्यंत महत्वपूर्ण है । सतगुरु वह है जो सच्चे ज्ञान का प्रदाता है और अपने शिष्य को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में मार्गदर्शन करता है । श्री गुरु अर्जुन देव जी अपनी वाणी में फुरमाते हैं-
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✨ हर रविवार की दिव्य दोपहर: 'आत्मदर्शनम्' ✨
‘आत्मदर्शनम्’ एक ऐसा अनोखा मंच है, जो आपको आत्मा की गहराई तक ले जाकर इन सवालों के उत्तर खोजने में मदद करता है। हर रविवार का अनुभव अद्वितीय और हृदयस्पर्शी होगा - ऐसा कुछ, जैसा पहले कभी न देखा, न सुना। परमधाम में युगल स्वरूप के साथ अष्ट पहर की लीलाओं के दिव्य दृश्य, जो आपके मन को आनंदमग्न कर देंगे और चितवन में ऐसी मधुरता भर देंगे कि मन केवल प्राणेश्वर और धाम में ही रम जाए। 🌹
कार्यक्रम की विशेष झलकियाँ:
खुद को जानें, अपने भीतर के आनंद और शांति से जुड़ें। ‘आत्मदर्शनम्’ में आपका स्वागत है।
#आत्मदर्शनम् #ध्यान #आध्यात्मिकज्ञान #प्रेरणा #समाधान #प्रेम #आध्यात्मिकयात्रा

क्या आपने इन सवालों पर कभी विचार किया है ??
✔️ मैं वास्तव में कौन हूँ?
✔️ जीवन का सच्चा उद्देश्य क्या है?
✔️ स्थायी शांति और आनंद कहाँ मिलते हैं?

आत्मदर्शनम् में क्या मिलेगा ??
✔️ ध्यान और साधना के माध्यम से मन की शांति का अनुभव।
✔️ भीतर छिपी अनंत शक्ति और दिव्यता को जागृत करना।
✔️ जीवन को एक नई दृष्टि और स्पष्टता के साथ देखना।

क्यों जुड़ें ‘आत्मदर्शनम्’ से ??
✔️ क्योंकि सच्चा सुख और शांति बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि आपके भीतर है।
✔️ आत्मदर्शनम्
आपको इस अनमोल सच्चाई का अनुभव कराता है।

आत्मदर्शनम् से कैसे जुड़े ??
📅 दिन: हर रविवार
🕒 समय: दोपहर 2:30 से 4:00 बजे
📍 स्थान: ज़ूम पर ऑनलाइन
📞 संपर्क करें:
कमलेश भाई पटेल: +91 96386 35307
प्रवीण भाई पटेल: +91 89802 03794
दुष्यंत तोमर जी (मेरठ, उत्तर प्रदेश)
मेरे प्रियतम के अलावा दूसरा कोई संबल नहीं है,
कोई सहारा
नहीं है, केवल राजजी हैं।
कमलेश भाई पटेल जी (हिम्मतनगर, गुजरात)
मंदिर, मस्जिद और चर्च सब जगह गए पर अंदर की शांति निजानंद सम्प्रदाय में आकर ही मिली।
प्रफुल्ला भंडेरी जी (सूरत, गुजरात)
धनी जी मैं सब कर सकती हूँ पर अपना दिल किसी और को नहीं दे सकती।
कनु भाई पटेल जी (यू.एस.ए.)
सतगुरु किसी तन का नाम नहीं है। तन तो बदलते रहते हैं।
उनके
अंदर की शक्ति को पहचानना है।
“सखियन की मीठी बतियाँ”
अधिक जानिएस्तुति शाह जी (न्यूज़ीलैंड)
Respect everyone but Love only one (Shri Rajji).
ज्योत्सनाबेन जी (राजकोट, गुजरात)
हे धाम धनी! इस संसार में यह तन रहे, ये श्वास रहें,
जितनी भी
आयु है तेरे नाम पर बीते तेरी सेवा में बीते।
विवेक यादव जी (कानपुर, उत्तर प्रदेश)
मेरे सतगुरु के दर्शन कर लिए तो समझो रब को देख लिया।
श्रीनिवास शर्मा जी (दिल्ली)
हम सब कौल करके आए हैं - जागो और जगाओ।
हम स्वयं जागें और सबको
जगाएँ।
इंद्रावती उप्रेती (नेपाल)
हमारी एक ही मंजिल है – वाणी मंथन करके राजजी का दीदार।
बाल व युवा केंद्र द्वारा
श्री बीतक साहिब
छोटे सुंदरसाथ द्वारा चित्रकारी, श्री बीतक साहिब, निर्देशित ध्यान
बाल केंद्र
चित्रकारी में बच्चों की सदैव विशेष रुचि देखी जा सकती है। चित्रकारी एक ऐसी कला है जिसमें चित्रकार अपनी भावनाओं और विचारों की भौतिक अभिव्यक्ति करता है। बच्चे जब चित्र बनाते हैं तो उनकी निर्मल और शुद्ध भावना उसमें देखी जा सकती है। 'श्री प्राणनाथ जी वाणी परिवार' बाल और युवा सुंदरसाथ की इस प्रतिभा के माध्यम से उन्हें ब्रह्मवाणी से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। इस सेवा में बच्चे श्री बीतक साहेब के प्रसंगों के चित्र अति उत्साह से बन रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों के द्वारा प्राप्त प्रतिक्रिया के अनुसार, बच्चों के हृदय में सभी प्रसंगों को अंकित होने और धनी के प्रति प्रेम की अनुभूति की जा रही है। हम चित्रकारी में रुचि रखने वाले सभी बाल और युवा सुंदरसाथ का इस सेवा के लिए प्रेमपूर्वक आह्वान करते हैं।
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38+
छोटे सुंदरसाथ द्वारा चित्रकारी
80+
श्री परमधाम चर्चनी बच्चों द्वारा
जल्द आ रहा है
बच्चों द्वारा बच्चों के लिए निर्देशित ध्यान
120+
2024 तक भाग लेने वाले बच्चों की कुल संख्या